Google doodle Rudolf Weigl: कौन थे रूडोल्फ़ वेइगल

Rudolf Weigl Biography In Hindi

Google Doodle celebrates Polish inventor Rudolf Weigl’s 138th birthday. Who was he? | गूगल डूडल ने पोलिश आविष्कारक रुडोल्फ वीगल का 138वां जन्मदिन मनाया। वह कौन था?

Google डूडल : Google ने गुरुवार को पोलिश के आविष्कारक व डॉक्टर और इम्यूनोलॉजिस्ट रूडोल्फ वीगल का 138 वां जन्मदिन डूडल के साथ मनाया गया । रुडोल्फ वीगल ने काफी पुरानी और सबसे ज़ादा संक्रामक होने वाले रोगों में से एक – महामारी जिसका नाम है टाइफस ,के लिए पहली बार असरदार टीका तैयार किया था। रुडोल्फ वीगल काम को दो – दो नोबेल पुरस्कार नामांकन से सम्मानित किया जा चुका है।

शरीर पर पाए जाने वाले जूँ टाइफस-संक्रमित बैक्टीरिया रिकेट्सिया प्रोवाज़ेकी को ले जाने के लिए रुडोल्फ वीगल (Rudolf Weigl) जाने जाते थे, यही देखते हुए रुडोल्फ वीगल ने छोटे से कीट को एक प्रयोगशाला के नमूने में अनुकूलित किया।

रुडोल्फ को अभिनव शोध से पता चला कि बहुत की खतरनाक जीवाणुओं को फैलाने के लिए जूँ का उपयोग कैसे किया जाता जा सकता है , जिसका वीगल ने एक वैक्सीन बनाने के मकसद से ताकि मानव को एक और उपलब्धि मिल सके इस आशा के साथ दशकों तक अध्ययन किया था। 1936 में, रुडोल्फ वीगल ने अपने टीके का पहला सफलता पूर्वक टीका पहले लाभार्थी को लगाया था |

Google द्वारा डूडल में रुडोल्फ वीगल को अपने हाथों में टेस्ट ट्यूब को पकड़े हुए दिखाया गया है। डूडल में एक दीवार पर एक तरफ जूँ है और दूसरी तरफ एक मानव शरीर के चित्र हैं जो सम्भोधित कर रहे है उनके द्वारा विकसित टिका जो की मानव सब्भियेता के उद्धार के लिए बनाई गई थी |

इलस्ट्रेटर के अनुसार Google को माइक्रोस्कोप, बन्सन बर्नर पर बीकर को , और होल्डर में टेस्ट ट्यूब को इन सभी को एक लैब टेबल पर रखा गया है।


Rudolf Weigl Biography रुडोल्फ वीगल जीवन परिचय

rudolf weigl biography

रुडोल्फ स्टीफन वीगल का जन्म 2 सितंबर, 1883 को ऑस्ट्रो-हंगेरियन शहर प्रेज़ेरो (आधुनिक चेक गणराज्य) में हुआ था। उन्होंने संस्कृत व पोलिश भाषा को अपनाया जब वे पोलैंड में पाले बड़े | रुडोल्फ वीगल आविष्कारक ने 1907 में पोलैंड के ल्वो विश्वविद्यालय में जैविक विज्ञान का अध्ययन किया |

उसके बाद उन्होंने जूलॉजी में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और 1914 में पोलिश सेना में एक परजीवी विज्ञानी के रूप में नियुक्त किया गया था।पूर्वी यूरोप में, लाखों लोग टाइफस से प्रभावित थे, जिसके कारण रुडोल्फ वीगल ने इस रोग को नियंत्रित करने का निश्चय किया।

जब द्वितीय विश्व युद्ध के फैलने के दौरान जर्मनी ने पोलैंड पर कब्जा कर लिया, तो वीगल को एक वैक्सीन उत्पादन संयंत्र खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने नए शासन के तहत उत्पीड़न के जोखिम में मित्रों और सहकर्मियों को काम पर रखने के लिए सुविधा का उपयोग किया।


Awards And Honors

हर साल 1930 और 1939 के बीच नोबेल पुरस्कार के लिए विशेष रूप से नामांकित किया जाता है। इस नामांकन के बावजूद, उन्हें टीका उपलब्धियों या सामाजिक कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। [

उनकी मृत्यु की आधी शताब्दी के बाद, कई लोग विग्गल्स के अनुसंधान, कार्य और सेवा को पहचानते हैं। 2003 में, उन्हें राष्ट्रों के बीच धर्मी के रूप में सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों के अनगिनत जीवन को बचाने के लिए इज़राइल और कामकाजी स्मृति द्वारा दिया गया था।

2 सितंबर, 2021 को, Google Google डूडल के साथ वीग्ल की 138 वीं वर्षगांठ मनाता है|


रुडोल्फ वीगल मृत्यु

युद्ध के बाद सीमा परिवर्तन के बाद, वीगल दक्षिणी पोलैंड में क्राको चले गए। उन्हें जगियेलोनियन विश्वविद्यालय में जनरल माइक्रोबायोलॉजी संस्थान का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, और बाद में पॉज़्नान में चिकित्सा संकाय में जीव विज्ञान का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह 1951 में सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उनके टीके का उत्पादन क्राको में कुछ वर्षों तक जारी रहा जब तक कि बंद नहीं हो गया। [23]

11 अगस्त 1957 को ज़कोपेन के पोलिश पर्वतीय रिसॉर्ट में वीगल की मृत्यु हो गई। वे 73 वर्ष के थे।


सम्भोधित करते हुए आज google ने रुडोल्फ वीगल की याद में कहा :-

Today, Weigl is widely lauded as a remarkable scientist and hero. His work has been honoured by not one but two Nobel Prize nominations. From studying a tiny louse to saving thousands of human lives, the impacts your tireless work had on the world are felt to this day—Happy Birthday, Rudolf Weigl,” .
आज, वीगल को एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक और नायक के रूप में व्यापक रूप से सराहा जाता है। उनके काम को एक नहीं बल्कि दो नोबेल पुरस्कार नामांकन से सम्मानित किया गया है। एक नन्ही-सी जूं का अध्ययन करने से लेकर हजारों मानव जीवन बचाने तक, आपके अथक परिश्रम का दुनिया पर जो प्रभाव पड़ा है, वह आज भी महसूस किया जाता है- हैप्पी बर्थडे, रुडोल्फ वीगल, ”|


You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page