Khudiram Bose Biography, Birth ,Death , history

Khudiram Bose Biography, Birth ,Death , history , खुदीराम बोसे जीवनी , जन्म , मृत्यु , इतिहास

प्रारंभिक जीवन

क्रांतिकारी खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 ई. को बंगाल के जिला मिदनापुर से कुछ किलोमीटर दूर एक गाँव हबीबपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मान त्रैलोक्य नाथ बोस और माता का नाम श्री मती  लक्ष्मीप्रिय देवी था। उनके बचपन में ही उनके माता पिता का साया उन पर से उठ गया था और वह अपनी के यहां मेदनपुर से तामलुक चले सन् 1904 में चलें गये, इसलिए उनका बचपन बड़ी बहन की देखरेख में व्यतीत हुआ। उनके ह्रदय में देशभक्ति की प्रबल इच्छा के कारण उन्होंने स्कूल में राजनीतिक गातिविधियों में भाग लेना प्रारंभ कर दिया था।

सन् 1902 और 1903 के दौरान अरविंदो घोष और भगिनी निवेदिता ने मेदिनीपुर में कई जन सभाएं की और क्रांतिकारी समूहों के साथ भी गोपनीय बैठकें आयोजित की। सन् 1904 में इन्होंने जगुनतार राजनीतिक पार्टी में सम्मलित हुए। खुदीराम बोस भी अपने शहर के उस युवा वर्ग में शामिल थे जो अंग्रेजी हुकुमत को उखाड़ फेंकने के लिए आन्दोलन में शामिल होना चाहता थे।

खुदीराम बोस प्रायः अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ होने वाले जलसे-जलूसों में शामिल होते थे तथा नारे लगाते थे। उनके मन में देश प्रेम इतना कूट-कूट कर भरा था कि उन्होंने नौवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी और देश की आजादी में मर-मिटने के लिए जंग-ए-आज़ादी में कूद पड़े। खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जो स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे। खुदीराम बोस भगवद् गीता में कर्म की धारणा से प्रभावित थे।

Khudiram Bose Biography

निजी जानकारी (Personal Information)

पूरा नामखुदीराम बोस या खुदीराम बासु
पेशाक्रांतिकारी
बालों का रंगकाला
आँखों का रंगकाला
उचाईज्ञात नहीं
उम्र18 वर्ष (1908 ई0 तक)
शैक्षिक योग्यता9वीं
ग्रहनगरहबीबपुर, जिला-मिदनापुर, वेस्ट बंगाल
विवाहित / अविवाहितज्ञात नहीं
नागरिकताभारतीय
जन्म स्थानहबीबपुर, जिला-मिदनापुर, वेस्ट बंगाल
जन्म तिथि3 दिसम्बर 1889
मृत्यु तिथि11 अगस्त 1908
मृत्यु कारणकिंग्सर्फोर्ड की मारने की योजना के तहत फांसी की सजा

खुदीराम बोस परिवार(khudiram bose Family)

पिता का नामत्रैलोक्य नाथ बोस (तहसीलदार)
माता का नामलक्ष्मीप्रिय देवी (धार्मिक महिला)
पत्नी की नामज्ञात नहीं
भाई का नामज्ञात नहीं

खुदीराम बोस का इतिहास

1889 –जन्म 3 दिसम्बर 1989 को हुआ।

1904 – तामलुक से मेदिनीपुर गए और क्रांतिकारी आंदोलन कारियो का हिस्सा बने।

1905 – ब्रिटिश सरकारी अफसरों को मारने के लिए पुलिस स्टेशन के बाहर बम ब्लास्ट किया।

1905 – राजनैतिक पार्टी जुगांतर में शामिल हुए।

1908 – 30 अप्रैल को मुजफ्फरपुर हादसे में शामिल हुए।

1908 – हादसे में लोगो को मारने की वजह से 1 मई को उन्हें गिरफ्तार किया गया।

1908 – हादसे में उनके साथी प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मारी और शहीद हुए।

1908 – खुदीराम के मुक़दमे की शुरुवात 21 मई से की गयी।

1908 – 23 मई को खुदीराम ने कोर्ट में अपना पहला स्टेटमेंट दिया।

1908 – 13 जुलाई को फैसले की तारीख घोषित किया गया।

1908 – 8 जुलाई को मुकदमा शुरू किया गया।

1908 – 13 जुलाई को अंतिम सुनवाई की गयी।

1908 – खुदीराम के बचाव में उच्च न्यायालय में अपील की गयी।

1908 – खुदीराम बोस को 11 अगस्त को फांसी दी गयी।

आज दिनांक 11 अगस्त को खुदीराम बोस को सिर्फ बंगाल में ही नही बल्कि पूरे भारत देश में याद किया जाता है। उनके युवाशक्ति की आज भी मिशाल दी जी जाती है।  भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में कई कम उम्र के नौजवानो द्वारा ने अपनी जान न्योछावर की गई, जिसमें एक नाम खुदीराम बोस का भी है जो कि स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है। खुदीराम बोस को ‘स्वाधीनता संघर्ष का महानायक’ भी कहा जाता है। निश्चित ही जब–2 भारतीय आज़ादी के संघर्ष की बात की जाएंगी तब–2 खुदीराम बोस का नाम गर्व से लिया जाएगा।


खुदीराम बोस क्रांतिकारी जीवन

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में स्वाधीनता आन्दोलन की विशाल प्रगति को देख अंग्रेजों भयभीत हो गये और उन्होंने बंगाल विभाजन की चाल चली जिसका खूब जोर शोर से विरोध हुआ। इसी दौरान सन् 1905 ई. में बंगाल विभाजन के बाद खुदीराम बोस स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने अपना क्रांतिकारी जीवन सत्येन नाथ बोस के नेतृत्व में शुरू किया था।

मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने पुलिस स्टेशनों के पास बम रखा और सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाया। वह रिवोल्यूशनरी पार्टी में शामिल हो गए और ‘वंदेमातरम’ के पर्चे वितरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन 1906 में पुलिस ने बोस को दूसरी बार पकड़ा और  28 फरवरी 1906 को ओमार सोनार बंगला नामक एक इश्तिहार बांटते हुए बोस पकडे गए पर पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे। इस मामले में उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया और उन पर अभियोग चलाया गया परन्तु गवाही न मिलने से खुदीराम बोस को निर्दोष करार दिया गया और उन्हें आजाद छोड़ना पड़ा।

दूसरी बार पुनः पुलिस ने उन्हें 16 मई को गिरफ्तार किया पर कम आयु होने के कारण उन्हें चेतावनी देकर फिर से छोड़ दिया गया।

6 दिसंबर 1907 को खुदीराम बोस ने नारायणगढ़ नामक रेलवे स्टेशन पर बंगाल के किंग्जफोर्ड गवर्नर की  ट्रेन पर हमला किया परन्तु गवर्नर बाल बाल बच गया। वर्ष 1908 में उन्होंने वाट्सन और पैम्फायल्ट फुलर नामक दो अंग्रेज अधिकारियों पर बम से हमला किया परन्तु वे भी बच निकले।


30 अप्रैल 1908 को किंग्जफोर्ड को मारने की योजना

अगर इस कांड में खुदीराम बोस द्वारा हिस्सेदारी न होती तो शायद खुदीराम बोस अग्रेंजी हुकूमत की नजर में न आते और अंग्रेजी हुकूमत उनसे इतना नाराज न होती और उन पर इतनी सख्त नहीं हुई होती। दरअसल  स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल कई लोगों को सेशन जज किंग्सफोर्ड कड़ी-कड़ी सजा सुनाते थे। यह खुदीराम बोस को बर्दाश्त नहीं हुआ, उन्होंने अपने साथी प्रफुल्लचंद चाकी के साथ मिलकर सेशन जज की गाड़ी पर बम फेंक दिया |

बंगाल विभाजन के विरोध में लाखों लोग सडकों पर उतर रहे थे जिसके कारण अनेक भारतीयों को उस समय कलकत्ता के मॅजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने क्रूर दण्ड दिया था। अग्रेजो द्वारा क्रान्तिकारियों को ख़ास तौर पर बहुत दण्डित करता थे। इस कारण अंग्रेजी सरकार ने किंग्जफोर्ड के कार्यों से खुश होकर उसकी पदोन्नति कर दी और मुजफ्फरपुर जिले का सत्र न्यायाधीश बना दिया।

किंग्जकोर्ड द्वारा क्रांतिकारियों पर जुल्म ढायें गये जिसके कारण क्रांतिकारियों द्वारा किंग्जफोर्ड को मारने का निर्णय किया और इस कार्य के लिए चयन हुआ नौजवान खुदीराम बोस और प्रफुल्लकुमार चाकी का। मुजफ्फरपुर पहुँचने के बाद इन दोनों ने किंग्जफोर्ड के बँगले और कार्यालय की निगरानी करनी प्रारम्भ कर दी।

30 अप्रैल 1908 को प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस किंग्जफोर्ड के बँगले के बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने लगे। खुदीराम बोस ने अँधेरे में ही आगे वाली बग्गी पर बम फेंका पर उस बग्गी में किंग्स्फोर्ड नहीं था बल्कि दो यूरोपियन महिलायें थीं जिनकी मौत हो गयी। अफरा-तफरी के बीच दोनों वहां से नंगे पाँव भागे।

भाग-भाग कर थक गए खुदीराम बोस वैनी रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां एक चाय वाले से पानी माँगा पर वहां मौजूद पुलिस वालों को उन पर शक हो गया और बहुत मशक्कत के बाद खुदीराम को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन उस वक्त कार में जज की जगह उनकी दो परिचित महिलाएं सवार थीं, हमले में दोनों ही महिलाओं की ही मौत हो गई। इस अनजाने में हुई घटना से खुदीराम बोस को भी बहुत दुख हुआ था। 1 मई को उन्हें वैनी से स्टेशन से मुजफ्फरपुर लाया गया।

उधर प्रफ्फुल चाकी भी  भूक-प्यासे इधर–उधर भाग रहे थे । 1 मई को ही त्रिगुनाचरण नामक ब्रिटिश सरकार में कार्यरत एक आदमी ने उनकी मदद की और रात को ट्रेन में बैठाया पर रेल यात्रा के दौरान ब्रिटिश पुलिस में कार्यरत एक सब-इंस्पेक्टर को शक हो गया और उसने मुजफ्फरपुर पुलिस को इस बात की जानकारी दे दी। जब प्रफुल्ल चाकी हावड़ा के लिए ट्रेन बदलने के लिए मोकामाघाट स्टेशन पर उतरे तो उनके इंतजार में बैठी पुलिस नें उन्हें पकड़ने का प्रयास किया परन्तु ब्रिटिशो के हाथ से उन्हें मरना मंजूर नही था इस कारण प्रफुल्ल चाकी ने खुद को गोली मार ली और शहादत को गले लगा लिया।

Khudiram Bose Biography

गिरफ्तारी और फांसी

खुदीराम बोस को 1 मई को स्टेशन से गिरफ्तार किया गया और उन पर 8 जुलाई को मुकदमा चलाया गया और 13 जुलाई को अंतिम फैसलो सुनाया गया जिसमें खुदीराम बोस को फांसी की सजा सुनाई गयी। 11 अगस्त सन 1908 को उन्हें फाँसी दे दी गयी। जिस समय उन्हें फासी पर चढ़ाया गया उस समय उनकी उम्र मात्र 18 साल थी।

फांसी के वक्त खुदीराम बोस अपने हाथ में गीता लिये हंसते-हंसते देश के लिए फांसी पर चढ़ गये। उनकी इस निडरता, वीरता और शहादत ने उनको इतना लोकप्रिय कर दिया कि बंगाल के जुलाहे में एक खास किस्म की धोती बुनने लगे और बंगाल के राष्ट्रवादियों और क्रांतिकारियों के लिये वह और अनुकरणीय और यादगार हो गए।

उनकी फांसी के बाद विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों ने शोक मनाया और कई दिन तक स्कूल बन्द रखे गये। इन दिनों नौजवानों में एक ऐसी धोती का प्रचलन हो चला था जिसकी किनारी पर खुदीराम लिखा हुआ होता था।


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FAQ’s

Q:-खुदीराम बोस का जन्म कब हुआ

Ans:- 3 दिसम्बर 1889

Q:-खुदीराम बोस का जन्म स्थान कहां है

Ans:- हबीबपुर, जिला-मिदनापुर, वेस्ट बंगाल

Q:- खुदीराम बोस किस पार्टी में सम्मलित हुए

Ans:- जगुनतार राजनैतिक पार्टी

Q:- खुदीराम बोस को फांसी की सजा कब सुनाई गई

Ans:- 13 जुलाई 1908

Q:- खुदीराम बोस को फांसी की सजा कब दी गई

Ans:- 11 अगस्त 1908

Q:- खुदीराम बोस के साथ-साथ और किस क्रांतिकारी ने अपनी जान गवाई

Ans:- प्रफुल्ल चाकी ने

Q:- खुदीराम बोस नें किंग्सफोर्ड पर कब हमला किया

Ans:- 30 अप्रैल 1908


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